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Saturday, July 31, 2010

Weekends ki kahani

हर weekend पे एक सवाल मेरे दोस्त का.. क्या plan है तेरा इस weekend का?
हर बार की तरह वही reply, अभी तक तो कुछ नहीं है मेरे भाई.
पर Friday night कट जाती है plan करते करते.
एक-आध movie देखते और बात करते करते..

जिनकी होती है girl-friend उनकी तो Friday night bonus होती है.
हम जैसे लोगो के लिए तो बस जुम्मा की रात होती है.
इसीलिए Saturday की सुबह शायद थोड़ी late होती है.
चाय और सुट्टा से दिन की सुरुवात होती है, की plan बनते है
अरे कुछ नहीं तो यार दोपहर तक कपडे धोकर,शाम को shopping mall चलते है

Shopping mall जाने को निकली अपनी टोली,पुराणी jeans और shirt tight है.
क्यों बे तेरे पास कपडे नहीं है, यार इस बार भी कपड़ो की तरह जेब tight है .
चलते चलते पूछा मैंने ,अभी अभी ही तो salary आई है  .
तो बोला दोस्त credit card के साथ साथ तेरा भी तो 5000 लौटाया है.
Purse में फूटी कौड़ी भी नहीं है, तेरी भाभी का photo और credit card है .
Bus का ticket तू दे देना मेरे यार, तू तो मेरा cash-card है.

Shopping mall का अपना ही अलग नजारा है,
इसके बिना तो यहाँ जीना कहा गवारा है .
लोगो के बीच में बस affair ज्यादा लफड़े कम दीखते है
नजर वही रुक जाती है जहा कपडे कम दीखते है.
हर बार सोचता था की, क्यों लोग कपडे हर week खरीदते है.
अब समझा सायद कम पड़ जाते है जब वो इसे पहनते है

कुछ चीज नयी जब दिख जाती है
पर price tag पहुच से बहार जाती है
कोई discount नहीं चल रहा है, फिर भी
Sales-person से discount है क्या?, पूछते है
जब discount होगा तो इतने का होगा calculate करके
अभी अभी तो लिया था यार, ये कह के नजर फेर लेते है
बस खाली हाथ लौट जाना होता है हर बार

चलो आज बहुत हो गया..अब करते है अगले weekend का इंतिजार

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